ज्योतिष को बोगस क्यों कहा जा रहा है और किस आधार पर कहा जा रहा है यह प्रश्न सभी व्यक्तियों के मन में अवश्य उत्पन्न होता होगा क्योंकि अब तक वह यही सुनते आए है कि ज्योतिष सही है, ज्योतिषी गलत हो सकता है ज्योतिष नहीं आदि। लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है ज्योतिष के सभी सिद्धांत बोगस है जो ब्रह्मांड की गलत जानकारी के आधार पर बनाए गए थे इसलिए सभी सिद्धांत गलत है और इस कारण से फलित ज्योतिष को बोगस कहा जा रहा है। आदिकालीन ब्रह्मांड का ज्ञान जिसके आधार पर ज्योतिष की रचना की गई थी वह निम्नालिखित है और आज के खगोल के ज्ञान अनुसार कहीं से भी सही नहीं है। जिन व्यक्तियो को लगता है कि ज्योतिष सही है वह आदिकालीन ब्रह्मांड के ज्ञान व आधुनिक खगोल के ज्ञान मे अन्तर को समझ कर स्वयं इस बात का निर्णय करें कि उन्हे किसके साथ चलना है - अपने उज्जवल भविष्य की ओर अथवा अन्धविश्वास के साथ ही बने रहना है।

• ज्योतिष का आधार है स्थिर व चपटी पृथ्वी ब्रह्मांड के केन्द्र मे है और सूर्य चन्द्र आदि सभी ग्रह पृथ्वी की ही परिक्रमा करते है।
- खगोल विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड का केन्द्र सूर्य है और पृथ्वी सहित सभी ग्रह उसी की परिक्रमा करते है पृथ्वी स्थिर व चपटी न होकर गोल व चलायमान है।
• भारतीय ज्योतिष मे ब्रह्मांड बेलनाकार है और सभी ग्रह एक के उपर एक इस क्रम मे स्थित है - पृथ्वी - सूर्य - चन्द्रमा - नक्षत्र - बुध - शुक्र - मंगल - गुरु - शनि। ज्योतिष के सभी सिद्धांत ब्रह्मांड की इसी प्रकार की जानकारी के आधार पर बनाए गए थे।
- खगोल विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड बेलनाकार नहीं है न ही ग्रह एक के ऊपर एक स्थित है सूर्य से ग्रहों का क्रम इस प्रकार है - सूर्य - बुध - शुक्र - पृथ्वी - मंगल - गुरु - शनि।
• ज्योतिष अनुसार ब्रह्मांड बेलनाकार है और शनि ग्रह तक ही है।
- खगोल विज्ञान अनुसार ब्रह्मांड बेलनाकार नहीं है और अनंत है।
• ज्योतिष अनुसार सूर्य चन्द्रमा दोनो ग्रह है - लेकिन विज्ञान के अनुसार सूर्य एक तारा है और चन्द्रमा पृथ्वी का उपग्रह - तो दोनो मे से कौन सही है - विज्ञान या ज्योतिष।
• ज्योतिष के अनुसार सभी नक्षत्र चन्द्रमा और बुध के मध्य स्थित है।
- खगोल विज्ञान के अनुसार नक्षत्र जो तारों का ही समूह है हमारी आकाशगंगा मे ही नहीं है - ज्योतिष और विज्ञान मे कौन सही है।
• ज्योतिष के अनुसार सूर्य चन्द्रमा आदि सभी ग्रह स्थिर पृथ्वी की परिक्रमा करते है।
- खगोल विज्ञान अनुसार चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और पृथ्वी आदि अन्य ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते है।
• ज्योतिष अनुसार सौरमंडल इस प्रकार का है - पृथ्वी - सूर्य - चन्द्रमा - नक्षत्र - बुध - शुक्र - मंगल - बृहस्पति - शनि।
- खगोल विज्ञान के अनुसार हमारे सौरमंडल मे ग्रहों की स्थिति इस क्रम मे है - सूर्य मध्य मे - बुध - शुक्र - पृथ्वी(चन्द्रमा) - मंगल - बृहस्पति - शनि और नक्षत्र/तारे सौरमंडल मे भी नहीं है।
• ज्योतिष के अनुसार राहु और केतु ग्रहण लगाते है।
- विज्ञान के अनुसार ग्रहण का कारण सूर्य चन्द्रमा और पृथ्वी ही है।
• ज्योतिष के ग्रह - सूर्य चन्द्रमा मंगल बुध गुरु शुक्र शनि राहु केतु।
- खगोल विज्ञान के ग्रह - पृथ्वी मंगल बुध शुक्र गुरु शनि यूरेनस नेपच्यून।
• ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी ग्रह नहीं है अतः ज्योतिष में भी नहीं है ग्रह न होने के कारण उसके प्रभाव की बात ज्योतिष नहीं करता है।
- खगोल विज्ञान के अनुसार पृथ्वी भी अन्य ग्रहों की तरह ही एक ग्रह है।
• ज्योतिष के अनुसार ग्रह वक्री अर्थात उल्टे भी चलते है
- खगोल विज्ञान अनुसार ग्रह उल्टे नहीं चलते है न ही चल सकते है।
• ज्योतिष मे ग्रहों को जीवित देवता माना गया है।
- खगोल विज्ञान के अनुसार ग्रह गैस व अन्य पदार्थों से निर्मित निर्जीव आकाशीय पिंड है।
• ज्योतिष में ग्रहों को जीवित देवता माने जाने के कारण ही मनुष्य पर उनके प्रभाव की बात कही गई है।
- खगोल विज्ञान के अनुसार ग्रह निर्जीव खगोलीय पिंड है जिनका की मनुष्य के भूत भविष्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

आदिकालीन और आधुनिक ब्रह्मांड के ज्ञान मे कितना अंतर है यह उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट ज्ञात हो जाता है यही वह आधार व जानकारी है जो फलित ज्योतिष की रचना का आधार बनी। जो व्यक्ति खगोल के आधुनिक ज्ञान से परिचित है वह समझ सकते है की इस तरह के ब्रह्मांड के ज्ञान के आधार पर बना ज्योतिष कितना सही हो सकता है, जब ज्योतिष की रचना का आधार ही सही नहीं है तो इसी आधार पर बने ज्योतिष के सिद्धांतों पर से सही भविष्यवाणी कैसे की जा सकती है यह समझना मुश्किल कार्य नहीं है। समय के साथ खगोल के ज्ञान में वृद्धि होती रही और ब्रह्माण्ड के विषय में हमारा ज्ञान सटीक व और विस्तृत्त होता गया लेकिन फलित ज्योतिष के साथ ऐसा नहीं हुआ वह आज भी आदिकालीन ब्रह्मांड के ज्ञान पर ही आधारित है और चल रहा है।

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