ज्योतिष सिद्धांतो का विषय है उसमे फलित के सिद्धांत है जिनके आधार पर ज्योतिषी भविष्य बताते है अतः जब बात ज्योतिष के सिद्धांतो की हो तो इस पर विचार करना अति आवश्यक होता है की क्या फलित के सिद्धांतो से सही भविष्यवाणी की जा सकती है? यह बात विचारणीय इसलिए है क्योंकि ज्योतिष सिद्धांतो का विषय है और ज्योतिषी कुंडली पर फलित के सिद्धांतों के प्रयोग से ही भविष्यवाणी करते है इसलिए यह अति आवश्यक हो जाता है की भविष्यवाणी के पीछे का सिद्धांत सही हो तभी भविष्यवाणी सही होगी और सिद्धान्त सही है या नहीं इसका आकलन भविष्यवाणी के व्यवहारिक रुप से सही होने के आधार पर न करते हुए सिद्धांत के वैज्ञानिक विधि से विश्लेषण करते हुए किया जाना चाहिए केवल इसी स्थिति मे ही ज्योतिष का वास्तविक आकलन संभव है। यदि आप इसी तरह से ज्योतिष का भविष्यवाणियो के आधार पर आकलन करते रहेगें तो सदैव भ्रम की स्थिति मे ही रहकर सही ज्योतिषी की तलाश मे भटकते रहेगें। भविष्यवाणी जो तीर-तुक्के के सिवाय कुछ नहीं होती है सही प्रतीत होती रहेगी और गलत भी जिससे न कोई ज्योतिषी सही होता है न ही गलत। और आप सही अर्थ मे ज्योतिष का वास्तविक आकलन कभी नहीं कर पाएगें व आपकी भ्रम की स्थिति का लाभ उठाकर ज्योतिषी इसी तरह आपको मूर्ख बनाकर लूटते रहेगें। उदाहरण के लिए यदि आप अपनी परीक्षा के संदर्भ मे एक सिक्का उछाल कर प्रश्न करे की मैं पास होऊँगा या फेल, अब जाहिर है की सिक्का किसी भी ओर गिर सकता है तो मान लें की वह पास होने की ओर गिरा और आप पास भी हो गए तो क्या आप यह मान लेंगे की सिक्का सही भविष्य बताने मे सक्षम है? और आप सिक्के पर विश्वास कर अगली परीक्षा के लिए पढ़ाई छोड़ देंगे क्योंकि पूर्व मे सिक्के ने सही भविष्य बताया है? जाहिर है नहीं क्योंकि सिक्के का तुक्का सही लग गया है और हर बार लगे यह आवश्यक नहीं है परीक्षा मे उतीर्ण आप अपनी मेहनत के कारण हुए है जो आपने परीक्षा की तैयारी के लिए की थी लेकिन परिणाम तब तक अनिश्चित था जब तक की परीक्षा का परिणाम नहीं आ गया(यदि आत्मविश्वास हो तो परीक्षा केंद्र से परीक्षा देकर निकलते ही परिणाम के विषय मे स्थिति स्पष्ट हो जाती है) परिणाम के विषय मे इस अनिश्चितता की स्थिति के कारण ही आपने सिक्के का सहारा लिया भले ही सिक्का हर बार पास होने ओर ही क्यों न गिरे पढ़ना तो आपको हर कीमत पर पड़ेगा सिक्का तो पास करवाने से रहा हाँ मनोवैज्ञानिक रूप से यह माना जा सकता है की आप सिक्के की बदौलत परीक्षा मे पास होते आ रहें है। बस यही सारा खेल ज्योतिष का है यदि यही पास या फेल का प्रश्न आप ज्योतिषी से करे तो उसके द्वारा कही गई बात के सही निकलने की सम्भावना उतनी ही होती है जितनी की सिक्के के गिरने की वह चाहे हाँ में हो अथवा न में क्यों न हो किसी न किसी के लिए तो सही हो ही जायेगी। वास्तव मे ज्योतिषी कोई सही भविष्यवाणी नहीं कर रहा होता है वह तो केवल आपकी मनःस्थिति का आकलन कर आपके पूर्वाग्रह जो की पास होने का है, की पुष्टि मात्र कर रहा होता है आपकी मनः स्थिति के आधार पर ज्योतिषी का सिक्का अर्थात तुक्का जिस ओर लग जाएगा वह स्वतः ही सही होगा अंतर केवल इतना ही है की सिक्का मनोविज्ञान नहीं जानता है इसलिए आपको उसके गिरने की ओर के साथ स्वयं ही तालमेल बिठाना होता है लेकिन ज्योतिषी के साथ यह समस्या नहीं होती है क्योंकि वह मनोविज्ञान को बखूबी जानता है और आपको सही भविष्यवाणी की पट्टी पढ़ाकर मनोवैज्ञानिक रूप से ज्योतिष का चमत्कार दिखाते हुए मूर्ख बनाकर घर वापिस भेज देता है। यह जाहिर है की आप परीक्षा के लिए की गई मेहनत के आधार पर उतीर्ण हो ही जाएँगे आपके इसी परिश्रम का आकलन ज्योतिषी ने किया और भविष्यवाणी कर दी और पास होने पर ज्योतिषी की बात को भविष्यवाणी समझ लिया जाता है जबकि आपकी सफलता के पीछे ज्योतिषी ज्योतिष या ग्रहों का कोई हाथ नहीं होता है लेकिन मनोवैज्ञानिक प्रभाव के चलते आप कभी यह बात समझ नहीं पाते है और ज्योतिषी की सही भविष्यवाणी का ढ़ोल पीट पीट कर स्वयं के परिश्रम लगन एवं आत्मविश्वास को अपने अंधविश्वास के कब्रिस्तान मे सदा के लिए दफन कर देते है और यही ज्योतिषी का उद्देश्य होता है अंधविश्वास फैलाना, जिसमे वह पूर्णतया सफल रहते है।

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