फलित ज्योतिष में अनेक ऐसे सिद्धांत है जो अब प्रासंगिक नहीं है अर्थात उनके अंर्तगत लिखी गई बातों का फलित होना नामुमकिन है। ऐसे ही कुछ सिद्धांतो का विस्तृत विवरण के साथ उल्लेख किया जा रहा है जिससे जिज्ञासु मित्रों को ज्ञात हो कि ज्योतिषी किस प्रकार से बोगस ज्योतिष पर से ठगी का धन्धा कर रहें है।

दारेशे शुभराशिस्थे स्वोच्चस्वर्क्षगतो भृगुः ।
पञ्चमे नवमेऽब्दे तु विवाहः प्रायशो भवेत् ॥२२
अर्थ:- सप्तमेश शुभग्रह की राशि मे हो, शुक्र उच्च राशि या स्वराशि हो तो 5 व 9 वर्ष की आयु मे विवाह होता है।

दारस्तानं गते सूर्ये तदीशे भृगुसंयुते ।
सप्तमैकादशे वर्षे विवाहः प्रायशो भवेत् ॥२३
अर्थ:- सप्तम भाव मे सूर्य हो, सप्तमेश शुक्र से युत हो तो प्राय: 7वें व 12वें वर्ष मे विवाह होता है।

कुटुम्बस्थानगे शुक्रे दारेशे लाभराशिगे ।
दशमे षोडशाऽब्दे च विवाहः प्रायशो भवेत् ॥२४
अर्थ:- दूसरे भाव मे शुक्र हो और सप्तमेश ग्यारह्वें भाव मे हो तो 10वें व 16वें वर्ष मे विवाह होता है।

लग्नकेन्द्रगते शुक्रे लग्नेशे मन्दराशिगे ।
वत्सरैकादशे प्राप्ते विवाहं लभते नरः ॥२५
अर्थ:- लग्न या केन्द्र मे शुक्र हो और लग्नेश शनि की राशि मे हो तो 11वें वर्ष मे विवाह होता है।

लग्नात् केन्द्रगते शुक्रे तस्मात् कामगते शनौ ।
द्वादशैकोनविंशे च विवाहः प्रायशो भवेत् ॥२६
अर्थ:- लग्न से केन्द्र मे शुक्र हो, उससे सातवें भाव मे शनि हो तो 12वें व 19वें वर्ष मे विवाह होता है।

धनेशे लाभराशिस्थे लग्नेशे कर्मराशिगे ।
अब्दे पञ्चदशे प्राप्ते विवाहं लभते नरः ॥२८
अर्थ:- द्वितीयेश लाभ भाव मे हो और लग्नेश दसवें भाव मे हो तो 15वें वर्ष मे विवाह होता है।

धनेशे लाभराशिश्ते लाभेशे धनराशिगे ।
अब्दे त्रयोदशे प्राप्ते विवाहं लभते नरः ॥२९
अर्थ:- धनेश लाभ भाव मे हो और लाभेश धन भाव मे हो तो 13वें वर्ष मे विवाह होता है।
(वृहद्पाराशर होराशास्त्र - द्वादशभाव विचाराध्याय: - विवाहसमयाह)

उपरोक्त सिद्धांतो के विश्लेषण की आवश्यकता नहीं है जिज्ञासु व्यक्ति सिद्धांतो के अंतर्गत लिखे गए फल को पढ़कर ही समझ सकते है कि सभी सिद्धांत बोगस है क्योंकि अब कानूनन विवाह की आयु 18/21 वर्ष है और इस आयु से पहले किसी का विवाह नहीं किया जा सकता है तो 5/9/13 वर्ष की आयु मे विवाह होना सम्भव नहीं है। बाल विवाह कानून से पहले जो बाल विवाह होते थे वह ग्रहों के प्रभाव की वजह से न होकर समाज मे फैली बहुत सी कुरीतियों के कारण होते थे लेकिन यदि हम थोड़ी देर के लिए मान भी लें कि बाल विवाह ग्रहों के प्रभाव के कारण ही होते थे, तो प्रश्न उठता है कि अब बाल विवाह क्यों नहीं होते? क्यों कानून के बनते ही बंद हो गए? क्या ग्रहों ने अपना प्रभाव बदल दिया? या वह प्रत्येक देश के कानून का पालन करते है? ऐसे अनेक प्रश्न उत्पन्न होते है जिनके सही उत्तर किसी ज्योतिषी के पास नहीं है न ही कभी होंगे क्योंकि वह जानते है कि ज्योतिष ठगी का धंधा ही है।
व्यक्ति यह तो मानते है कि ग्रहों का भविष्य पर प्रभाव पड़ता है लेकिन यह नहीं जानते है कि वह प्रभाव ज्योतिष के सिद्धांत अनुसार ही पड़ेगा। व्यक्ति के दैनिक जीवन के कार्य/विषय को प्रभावित/संचालित करने के लिए ग्रहों को ज्योतिष के सिद्धांत अनुसार कार्य करना पड़ेगा, क्योंकि ज्योतिष के सिद्धांतो में लिखित फल तभी मिलेगा जब ग्रह उन सिद्धांतों का अनुसरण करते हों। लेकिन उपरोक्त सिद्धांतो में लिखित फल को पढ़कर कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि ग्रह ज्योतिष के सिद्धांत अनुसार कार्य करते हों, यदि ऐसा होता तो आज भी 5,7,9 वर्ष की आयु में सभी के विवाह होते जबकि यह योग तो अब भी बनते है जैसे कि 22वां सिद्धांत - 19 जून 2006 से 14 जुलाई 2006 की ग्रह स्थिति जब शुक्र स्वराशि वृष मे था और सभी ग्रह शुभ ग्रह की राशि मे स्थित थे तो इस समय के दौरान पैदा हुए सभी बच्चो का विवाह 5 और 9 वर्ष की आयु मे ही हो जाना चाहिए था, तो ग्रहों के साथ अब ऐसा क्या हो गया कि वह 5,7,9 वर्ष की आयु में विवाह न करवा कर (अपने ही सिद्धांतो को दर-किनार कर) 28-29 वर्ष की आयु तक रुकने लगे? इस सम्बन्ध में अनेक तथ्य व तर्क रखे जा सकते है लेकिन उपरोक्त विवेचन से यह स्पष्ट हो जाता है कि ग्रहों का हमारे भूत भविष्य पर कोई प्रभाव नहीं पङता है न ही ग्रह ज्योतिष के सिद्धांत अनुसार कार्य करते है, वह इसके लिए बाध्य नहीं है अतः फलित ज्योतिष बोगस विषय है।
अब ज्योतिषी तो इन सिद्धांतो पर चर्चा करने के लिए आगे आएंगे नहीं (हां किसी बेअक्कल ग्राहक के आते ही कुकुरमुत्तों की तरह प्रकट अवश्य हो जाते है ताकि उसे लूटा जा सके) क्योंकि वह जानते है कि ज्योतिष तो है ही बोगस तो वह इसे कैसे सही सिद्ध करे! यह बात अब आपको समझनी है इस से पहले की बहुत देर हो जाए समय रहते ही समझ जाएं की - ज्योतिष एक गोरखधंधा है।

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