ज्योतिष बोगस है यह बात ज्योतिष का गहन अध्ययन करने वाले व्यक्ति अच्छी तरह से जानते है जिनमे ज्योतिषी भी शामिल है। ज्योतिषीयों को स्वयं पता है कि ज्योतिष बोगस है विशेष रुप से अनेक वर्षो से ज्योतिष का कार्य करने वाले ज्योतिषीयों को। इसीलिए ज्योतिषी चर्चा नहीं कर रहें है क्योंकि जानते है कि ज्योतिष तो है ही बोगस उसे सही सिद्ध नहीं कर सकते है इसलिए चुपचाप बैठकर ज्योतिष की धुलाई होते देखने के सिवाए उनके पास कोई और चारा भी नहीं है लेकिन व्यक्ति के आस्था श्रद्धा व विश्वास का लाभ उठाकर ग्रहों का भय दिखाकर उन्हे लूटते है क्योंकि यही उनका धन्धा है। ज्योतिष सिद्धांतो का विषय है न कि आस्था व श्रद्धा का - ज्योतिषीयों ने ज्योतिष को आस्था श्रद्धा धर्म भगवान आदि विषयो से जोङ दिया है जिससे की उनका ठगी का धन्धा बे-रोक टोक के चलता रहे और ज्योतिषी इसमे कामयाब भी हुए है क्योंकि अन्धविश्वासी समाज अपने अज्ञान के कारण आस्था श्रद्धा के नाम पर लुट रहा है और ज्योतिषीयों का धन्धा आराम से चल रहा है। किसी ने विरोध की आवाज उठाई भी तो ज्योतिषी आस्था श्रद्धा धर्म भगवान संस्कृति इत्यादि का मोर्चा लेकर बैठ जाते है जिसके कारण अन्धविश्वासी समाज उन्ही के पदचिन्हो पर चलते हुए उस व्यक्ति की बात को अनसुना करते हुए स्वयं अपने पैर पर कुल्हाङी मारते है जिसका लाभ ज्योतिषीयों को मिलता है फलस्वरुप उनका धन्धा चमकता है।
कोई भी व्यक्ति जब ज्योतिष सीखना चाहता है तो उसे सही समझकर भविष्य जानने/बताने के विचार से ही सीखता है। ज्योतिष सीखने के बाद जैसे जैसे वह ज्योतिष का और गहन अध्ययन/कुंडली विश्लेषण आदि करता जाता है तो उसे समझ मे आने लगता है कि यह सही नहीं है धीरे धीरे एक दिन ऐसा आता है कि उसे पूर्ण विश्वास हो जाता है कि ज्योतिष पूर्णत बोगस है लेकिन अपने ठगी के धन्धे अर्थात आसानी से पैसे कमाने के उद्देश्य से इसका त्याग नहीं करते है और अन्धविश्वासी समाज को लूटते तो है ही लेकिन साथ ही समाज मे ज्योतिष के बोगस ग्रह दोष का एक ऐसा जहर घोलते है जो पौराणिक कथाओं के अनुसार कालकूट नाम जहर से भी अधिक विषैला है। सदियों से ज्योतिषी अन्धविश्वासी समाज को ऐसा धीमा जहर दे रहें है जो व्यक्ति के डी.एन.ए मे रच बस गया है और अनुवांशिकी को विकृत कर चुका है जिसका परिणाम यह है कि व्यक्ति जन्म से लेकर मृत्यु तक ज्योतिषीयों के ग्रह दोष के जाल मे फसकर अपना जीवन ही बर्बाद कर देते है। व्यक्ति अपना तन मन धन स्वेच्छा से न्यौछावर कर रहे है अपना भविष्य जानने और करोङो कि.मी. दूर स्थित ग्रहों ठीक करने के लिए। वह भी ऐसे ग्रह जिन पर आधुनिक विज्ञान को पहुंचने मे वर्षो का समय लगेगा उसी ग्रह को एक मिनट से भी कम समय मे मसूर दाल बहाकर ठीक किया जा रहा है कितनो का ठीक हो रहा है वही जाने। केवल अपने ठगी के धन्धे के लिए ज्योतिषीयो ने ऐसे योग दोष बना दिए है जिनका कि किसी भी ज्योतिष की प्राचीन पुस्तक मे उल्लेख नहीं है जिनमे कालसर्प योग मंगल दोष नाङी दोष अष्टकूट मिलान शाढे-साती ढैय्या आदि प्रमुख है। इनके अलावा भी अनेक योग दोष है जिनको ज्योतिष की वास्तविकता से अन्जान समाज को मूर्ख बनाकर लूटने के उद्देश्य से ही बनाया गया है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि यदि इन योगो का जिक्र ज्योतिष की किसी प्राचीन पुस्तक मे होता तो यह सही होते, ऐसा बिल्कुल नहीं होता यह तब भी बोगस ही रहते क्योंकि ज्योतिष की रचना का आधार ही गलत है। इसी प्रकार से ज्योतिषीयों ने ऐसे टोटको का निर्माण कर लिया है जिनका भी किसी ज्योतिष की पुस्तक मे कोई उल्लेख नहीं है कारण अन्धविश्वासी समाज को भ्रमित कर अपने ठगी के धन्धे को चलाए रखने के लिए।
ज्योतिष मे ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है जो सटीक तो छोङो पर भविष्य की किसी घटना का वर्णन पहले ही कर दे। ज्योतिषी इस बात को अच्छी तरह से जानते है इसलिए दोष उन्ही को दिया जाएगा भले ही उन्होने सिद्धांतो को नहीं बनाया लेकिन बोगस सिद्धांतो के प्रयोग से समाज मे अन्धविश्वास का जहर घोलने का कार्य भी ज्योतिषी ही कर रहें है। स्टीक भविष्यवाणी का दावा करने वाले ज्योतिषी अपनी भविष्यवाणी के पीछे के ज्योतिषीय सिद्धांत को नहीं जानते है, बताने मे असमर्थ है तो जाहिर है कि ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है और व्यक्ति को विवाह होगा, नौकरी लगेगी, व्यापार चलेगा, स्वास्थ्य खराब रहेगा आदि जीवन की सामान्य घटनाओं को भविष्यवाणी का नाम देकर मूर्ख बनाया जा रहा है। यदि ज्योतिषी सटीक भविष्य बता सकते और टोटके से उसे बदला जा सकता तो क्या दुनिया मे जो कुछ भी हो रहा है अथवा आपके साथ जो अनचाहा घटित हो रहा है वह होता ? प्रत्येक व्यक्ति अपने भविष्य को जानकर उसे मनचाहा रुप देकर सर्वसुखी होते। यदि भविष्य को जान सकते तो कभी कोई विद्यार्थी फेल नहीं होता, एक भी दुर्घटना नहीं होती, सभी नौकरी कर रहे होते, टोटके करके सब माला माल होते यहां तक कि दाल मे नमक भी ज्यादा नहीं पङता। लेकिन ऐसा तो कुछ भी नहीं होता चाहे कितने ज्योतिषीयों के चक्कर काट लो और टोटके करते रहो कुछ भी नहीं होने वाला है। ऐसा इसलिए कि जिस अन्जाने भविष्य का डर आपके दिमाग मे बैठ गया है ज्योतिषीयों ने ग्रह योग से जोङकर उस डर को और बढ़ा दिया है परिणामस्वरुप व्यक्ति करोङो कि.मी. दूर स्थित ग्रहों से डरने लगे है जिनमे से दो - राहु केतु - तो ऐसे है जिनका पदार्थ रुप मे अस्तित्व भी नहीं है और कुंडली मे ही नहीं है। ज्योतिषी जो अपना भविष्य भी नहीं जानते वह दूसरों का कैसे बता देगें - अगर आप कहें कि ज्योतिष से, तो उस से अपनी कुंडली बनाकर बोगस सिद्धांत लगाकर अपना भविष्य भी जाना जा सकता है ! यदि बोगस सिद्धांतो से सही भविष्य ज्ञात हो सकता तो ज्योतिषीयों को ठगी का धन्धा करने की आवश्यकता क्यों पङती। जो ज्योतिषी अपने जीवन मे सही मार्ग का चुनाव नहीं कर पाए वह किसी अन्य व्यक्ति का क्या मार्गदर्शन करेगें - स्वयं विचार करें।
सभी ज्योतिषी अपने नाम के आगे आचार्य लगाए होते है जब्कि उन्हे आचार्य जैसे आदरणीय शब्द का अर्थ भी नहीं पता। मेष राशि के प्रारम्भिक बिन्दु का भी जिन ज्योतिषीयो को ज्ञान नहीं है वह आचार्य ऐसे लिखते है जैसे इनकी बपौती हो - स्वयं गीता के उपदेशक श्री कृष्ण भी आचार्य नहीं कहलाए तो 28 नक्षत्रों को 27 करने वाले ज्योतिषी कहां के आचार्य है ! भविष्य मे जब ऐसे व्यक्तियों की संख्या बढेगी जो अपनी बुद्धि व विवेक से कार्य करेगे और जानेगें कि ज्योतिष बोगस है और ज्योतिषी ठग, तो ऐसे आचार्यो का क्या होगा आप समझ सकते है। ज्योतिषीयों ने समाज को पथभ्रष्ट कर दिया है जो समाज कभी ऋषियों के दिए ज्ञान के अनुसार चलता था वही आज ज्योतिषीयों के बिछाए भ्रम जाल पर चल रहा है। ऐसा होता ही नहीं यदि पन्चांग सुधार आयोग ने अपनी अन्तरात्मा की आवाज सुनकर सच का साथ दिया होता बजाय ज्योतिषीयों के पक्ष मे खङे होने के तो आज हम फिर से ऋषियों के बताए मार्ग पर चल रहे होते। जो त्यौहार उत्सव ऋतु अनुसार मनाए जाते थे ज्योतिषीयों के कारण अपने दिन के महत्व को खो चुके है और सभी गलत समय पर मनाए जा रहे है इन ज्योतिषीयो ने उनकी मूल भावना और स्वरुप को ही बिगाङ दिया है केवल अपने ठगी के धन्धे के लिए।
ज्योतिष के प्रचार विस्तार और अपनी पकङ मजबूत करने मे जितना समय लगा है उससे कहीं अधिक समय इसे समाप्त होने मे लगेगा क्योंकि किसी बात को फैलने मे अनेक कारको का हाथ होता है और उसी बात को शून्य होने मे उन्ही कारकों के माध्यम से सही तथ्य को पहुंचाने मे समय लगता है और ऐसा करना सरल नहीं होता है। ऐसा तो किसी देश की सरकार के लिए भी करना सरल नहीं होता जिसके पास पूरा तन्त्र होता है उसे भी जन जन तक अपनी बात पहुंचाने से वर्षो का समय लग जाता है तो ज्योतिष बोगस है और ज्योतिषी ठग यह बात समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए आप दो या तीन व्यक्तियों से क्या उम्मीद रख सकते है। वह केवल अपनी बात को रख सकते है और उन्ही व्यक्तियों तक पहुंचा सकते है जहां तक उनकी पहुंच है या उनसे किसी न किसी माध्यम से जुङे हुए है। समाज मे बदलाव लाने, अन्धविश्वास को समाप्त करने, जागृति लाने आदि का कोई भी प्रयास तभी सफल होता है जब वह सामूहिक हो। हमे आजादी भी तभी मिली जब समस्त भारतीयों ने सामूहिक रुप से एकजुट होकर आजादी के लिए लङाई लङी संघर्ष किया। तो आज हमे ज्योतिष व अन्य सभी प्रकार के अन्धविश्वास को समाप्त करने के लिए सामूहिक रुप से जन जागरण का कार्य करने की आवश्यकता है। क्या अपने देश, परिवार व आने वाली पीढ़ीयों के प्रति आपका इतना फर्ज भी नहीं बनता कि जिस अन्धविश्वास के कारण आप ज्योतिषीयों के द्वार पर अपना तन मन और धन लुटाते रहे आने वाली पीढ़ीयों को उस गुलामी से मुक्ति दिलाएं - जरा सोचिये। स्मरण रहे कि भविष्य वर्तमान पर ही आधारित होता है अभी आपके पास पर्याप्त समय है अपने वर्तमान को सुधारकर भविष्य को बचाने का अतः अपने वर्तमान के मूल्य को पहचानिए और ज्योतिषीयो के पास जाकर भविष्य जान कर उसे टोटके से बदलने की बजाय योग्यता ज्ञान व आत्मविश्वास को बढाएं जिससे कि आप विपरीत परिस्थितियों मे भी अपनी बुद्धि व विवेक से सही निर्णय ले सकें तभी अन्धविश्वास से मुक्ति सम्भव है। - इस लेख को पढकर आपको लगेगा कि यह ज्योतिषीयो के खिलाफ लिखा गया है जब्कि ऐसा नहीं है ज्योतिष के कारण समाज का जो सत्यानाश हुआ है वह ज्योतिषीयों द्वारा किस प्रकार से किया गया है इसकी जानकारी दी गई है।

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