कालसर्प योग - इस योग से सभी परिचित है इस योग से व्यक्ति बहुत डरते है डरे भी क्यों नहीं ! नाम ही ऐसा है "कालसर्प योग" पता नहीं ज्योतिषीयों ने डायनासोर योग क्यों नहीं बनाया उस से व्यक्ति ज्यादा डरते, हो सकता है कि भविष्य के ज्योतिषी बना दे और उस समय मे किंग कांग योग, एनाकोंडा योग आदि भी देखने को मिल जाए खैर अभी बात कालसर्प योग की है तो उसी की बात करते है। ज्योतिष अनुसार कालसर्प योग तब बनता है जब सूर्य चन्द्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि सभी ग्रह राहु-केतु या केतु-राहु के मध्य मे स्थित हो। यदि आपको खगोल का सामान्य ज्ञान है और राहु केतु की आकाशीय स्थिति देखें तो पायेगें कि कालसर्प योग के अनुसार सभी ग्रह राहु केतु के मध्य मे स्थित नहीं हो सकते है अतः यह योग पूर्णत बोगस है। ज्योतिषीयों ने समाज मे कालसर्प योग का ऐसा डर बिठा दिया है कि प्रत्येक व्यक्ति अनावश्यक रुप से ही भयभीत होकर इस बोगस योग की शांति के नाम पर हजारो/लाखों रुपये लुटा रहें है ज्योतिषी इस योग के अशुभ प्रभाव से उन्हे बचाने के लिए, विशेष पूजा, हवन आदि करवाने के रुप मे और व्यक्ति खुशी से राहु केतु - दो कटान बिन्दु मात्र - के बुरे प्रभाव से खुद की रक्षा करने के लिए पैसे खर्च करते हैं - जाहिर है, क्योँकि वह सच्चाई नहीँ जानते है, और कोई भी हानि नहीँ उठाना चाहता है। ज्योतिषियों के अनुसार व्यक्ति का जीवन काल-सर्प योग के हानिकारक प्रभाव की वजह से नष्ट हो जाएगा/जाता है अर्थात कालसर्प योग के बहुत बुरे परिणाम होते है बहुत से ज्योतिषी यह कहते हुए भी मिल जाएँगे कि, कालसर्प योग का प्रभाव हमेशा अशुभ ही नहीँ होता है ! शुभ भी होता है. परिणाम ग्रहोँ की स्थिति पर भी निर्भर करता है - अर्थात राहु केतु कहाँ स्थित है जातक की कुँडली मेँ, किस प्रकार का योग है आदि इस योग से सम्बन्धित अनेक प्रकार की भ्रांतियां फैलाकर केवल ठगी का धन्धा किया जा रहा है जब योग ही बोगस है तो डर किस बात का लेकिन अन्धविश्वासी व्यक्ति तो किसी अंग के फङकने से ही डर जाते है तो ग्रहों से क्यों नहीं डरेगें।
परन्तु सच तो यह है कि ज्योतिष के किसी भी प्राचीन(आदि) शास्त्र मे कालसर्प योग का उल्लेख नहीं किया गया है तो यह योग आया कहां से, कब और किसने इस योग की खोज की किसी ज्योतिषी को नहीं पता है। यह भी इन ज्योतिषियोँ द्वारा बनाया गया है व्यक्तियोँ को अपने मक्कड़ जाल मे फसाने के लिए २८४ प्रकार के कालसर्प योग बना दिए गए है जाहिर है कि व्यक्ति कहीं न कहीं किसी योग से फंस ही जाएगा पूर्ण कालसर्प योग नहीं तो आंशिक ही सही मतलब तो ठगी से है। इसी प्रकार से हर रोज नए योग/सूत्र बना दिए जाते है बिना किसी आधार के 50:50 के तरीके से यदि इधर 50 मे नहीं तो उधर 50 मे तो मिल ही जाएगा जिस प्रकार का योग व्यक्ति की कुंडली और जीवन से मेल रखते हुए मिल गया बस उसी ग्रह योग-दोष के नाम पर उसे लूट लो और ऐसे व्यक्ति की कुंडली दिखा कर अन्य को भी लूटते रहो। यहाँ पर कुछ जाने माने व्यक्तियोँ के नाम का उल्लेख किया जा रहा है जिनकी कुँडली मे कालसर्प योग था - धीरू भाई अंबानी, सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर, ऋषिकेश मुखर्जी, पं. जवाहर लाल नेहरू, अब्राहम लिंकन, मुसोलिनी, विजय लक्ष्मी पंडित, डॉ राधा कृष्णन, देवकी नंदन खत्री, अशोक कुमार, दिलीप कुमार, रोनाल्ड रीगनरवि शास्त्री, अरुण नेहरू। यदि कालसर्प योग होता है और उसका अशुभ प्रभाव होता है तो क्या यह सब लोग इतनी प्रसिद्धि प्राप्त करते। ऐसे ही व्यक्तियोँ की कुँडलियोँ का उल्लेख कर के इस योग का व्यक्ति की परिस्थिति से मिलान कर अशुभ अथवा शुभ प्रभाव कह देते है इस से किसी भी व्यक्ति को भी यकीन हो जाता है कि सही मेँ इस योग का शुभ/अशुभ प्रभाव ऐसा होता है।
अन्त मे संक्षेप मे कहा जा सकता है कि कालसर्प योग तब बनता है जब ज्योतिषी जी को कोई महंगी वस्तु लेनी हो जैसे मोटरसाईकिल मोबाईल, एल.ई.डी टीवी आदि। कुछ ज्योतिषी जो बङे विद्वान कहलाते है वह तो कार तक खरीद लेते है इस योग के कारण - इस योग की शान्ति करवाने की फीस ही इतनी है। इसलिए इस कालसर्प योग के चक्कर मे न पङे, ऐसा कोई योग होता ही नहीँ है। ऐसी कोई विशेष पूजा या हवन करवाने से भी बचेँ और अपने धन को व्यर्थ मे नष्ट न करे न तो राहु केतु आपकी कुंडली मे है न ही कालसर्प योग - सब ठगी का धन्धा है क्योंकि पूरा फलित ज्योतिष ही बोगस है जो अन्धविश्वास के आधार पर निर्मित किया गया धन्धा है।

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